Pratapgarh

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:: Maa ::

माँ तुम्हें पढ़कर तुम्हारी उँगली की धर कलम गढ़ना चाहता हूँ तुम सी ही कोई कृति तुम्हारे हृदय के विराट विस्तार में पसरकर सोचता हूँ मैं और खो जाता हूँ कल्पना लोक में फिर भी सम्भव नहीं तुम्हें रचना शब्दों का आकाश छोटा पड़ जाता है हर बार तुम्हारी माप से माँ तुम धरती हो।

:: औरतें ::

औरतें – मनाती हैं उत्सव दीवाली, होली और छठ का करती हैं घर भर में रोशनी और बिखेर देती हैं कई रंगों में रंगी खुशियों की मुस्कान फिर, सूर्य देव से करती हैं कामना पुत्र की लम्बी आयु के लिए। औरतें – मुस्कराती हैं सास के ताने सुनकर पति की डाँट खाकर और पड़ोसियों के उलाहनों में भी। औरतें – अपनी गोल-गोल आँखों में छिपा लेती हैं दर्द के आँसू हृदय में तारों-सी वेदना और जिस्म पर पड़े निशानों की लकीरें।

:: बेटियाँ ::

बेटियाँ रिश्तों-सी पाक होती हैं जो बुनती हैं एक शाल अपने संबंधों के धागे से। बेटियाँ धान-सी होती हैं पक जाने पर जिन्हें कट जाना होता है जड़ से अपनी फिर रोप दिया जाता है जिन्हें नई ज़मीन में। बेटियाँ मंदिर की घंटियाँ होती हैं जो बजा करती हैं कभी पीहर तो कभी ससुराल में। बेटियाँ पतंगें होती हैं जो कट जाया करती हैं अपनी ही डोर से और हो जाती हैं पराई। बेटियाँ टेलिस्कोप-सी होती हैं जो दिखा देती हैं– दूर की चीज़ पास।

:: फैशन का टशन या टेंशन ::

आजकल की लड़कियों का फैशन देख किसी को समझ ही नहीं आता है कि आखिर यह हो क्या रहा है? मंगलसूत्र और सिंदूर को लड़कियां टेंशन का नाम देती हैं तो साड़ियां सिर्फ अलमारी में पड़ी पडी कभी कभार ही निकल पाती हैं. सर पे सिंदूर का “फैशन” नही है, गले मे मंगलसूत्र का “टेंशन” नही है! माथे पे बिंदी लगने मे शर्म लगती है, तरह तरह की लिपस्टिक अब होंठो पे सजती है! आँखो मे काजल और मस्कारा लगाती हैं, नकली पलकों से आँखो को खूब सजाती हैं!

ख्वाबो में तुम बसने लगे हो

दिल में चाहत बनकर धड़कने लगे हो ,,
कैसा है अहसास ये दूर होने पर पास लगने लगे हो ,,
नाम ओठो पर आने लगा है पर दिल है जो कुछ छुपने लगा है ,
काले बालो की छाया से धका हुआ तेरा चेहरा 
अब अक्सर मुझे तड़पने  आने लगा है ,,
शर्म से भरी तेरी आँखे इज़हार ये करने लगी है 
शब्दों का ये खेल नही आँखे अब  बताने लगी है 
जो सपना था वो मेरा, अब अपना होने लगा है 
एक ही मुलकात में सब कुछ जैसे खोने लगा है 
ये इश्क है या मेरी

मै आतंकी बनूँ अगर माँ खुद "फंदा" ले आएगी

प्रिय दोस्तों इस रचना को ( कोई नहीं सहारा ) आज ३.३.२०१3 के दैनिक जागरण अखबार में कानपुर रायबरेली (उ.प्रदेश भारत ) आदि से प्रकाशित किया गया रचना को मान और स्नेह देने के लिए आप सभी पाठकगण और जागरण जंक्शन का बहुत बहुत आभार

Legislator of First U.P. Assembly From Pratapgarh Felicitated

Rajaram Kisan, now 98 years old, was a legislator in the first elected Assembly in Uttar Pradesh in 1952. On Sunday, he was honoured by the UP chief minister Akhilesh Yadav during the 125th year celebrations of the state legislature.

Raja Ram Kisan was elected in 1952 on the Congress ticket from Kunda in Pratapgarh district. He lives in his Kisan Ashram in Pratapgarh district, does not have a bank balance or a car and spends his time tending to his cows and a small farm.

Happy Ramdan

Happy ramdan to all my cetezens Pratapgarh.

बूढा पेड़

POOPOLITICAL

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