Pratapgarh

An unofficial website of district Pratapgarh, UP, India

Blogs

FULL HD WATCH! The Walking Dead Season 9 Episode 14 HDHQ

In this post, we are going to talk about Watch The Walking Dead Season 9 Episode 14 release date, where to watch, and spoilers. But before that, I would like to take a quick recap of the previous to understand better what is waiting in the next episode. The Walking Dead Season 9 Episode 14 “Scars” Full Online Free HD. The Walking Dead Season 9 Episode 14 The Best Quality Here at “dbltube” Yessss. Scars – The Walking Dead Season 9 Episode 14 [720p] HDTV can be found on our website including the Quality The Walking Dead Season 9 Episode 14 HDHQ [1080p].

काश ! कि मैं इक बेटा होती !!!

मैं जब भी

काश वो मेरा बेटा न होता ।।

वृद्धाश्रम में बूढ़ी माँ से मिलकर लौट रहा बेटा कार में बैठते हुए हाथ हिलाकर कह रहा है बाय बाय माँ अगले मदर्स डे पर फिर मिलेंगे। काश वो मेरा बेटा ही न होता ।।

माँ आँचल सुख

 

भारत माँ की बड़ी दुलारी हिंदी रानी

भारत माँ की बड़ी दुलारी हिंदी रानी
=================================

इक ग़ज़ल उस पे लिखूँ दिल का तकाज़ा है बहुत

इक ग़ज़ल उस पे लिखूँ दिल का तकाज़ा है बहुत इन दिनों ख़ुद से बिछड़ जाने का धड़का है बहुत रात हो दिन हो ग़फ़लत हो कि बेदारी हो उसको देखा तो नहीं है उसे सोचा है बहुत तश्नगी के भी मुक़ामात हैं क्या क्या यानी कभी दरिया नहीं काफ़ी, कभी क़तरा है बहुत मेरे हाथों की लकीरों के इज़ाफ़े हैं गवाह मैं ने पत्थर की तरह ख़ुद को तराशा है बहुत

आग है, पानी है, मिट्टी है, हवा है, मुझ में

आग है, पानी है, मिट्टी है, हवा है, मुझ में| और फिर मानना पड़ता है के ख़ुदा है मुझ में| अब तो ले-दे के वही शख़्स बचा है मुझ में, मुझ को मुझ से जुदा कर के जो छुपा है मुझ में| मेरा ये हाल उभरती हुई तमन्ना जैसे, वो बड़ी देर से कुछ ढूंढ रहा है मुझ में| जितने मौसम हैं सब जैसे कहीं मिल जायें, इन दिनों कैसे बताऊँ जो फ़ज़ा है मुझ में| आईना ये तो बताता है के मैं क्या हूँ लेकिन, आईना इस पे है ख़मोश के क्या है मुझ में| अब तो बस जान ही देने की है बारी ऐ "नूर",

हमें अनपढ़-गंवार बुलाते हो

झूठे इतिहास लिखकर, विजेता बन बैठे तुम, पाखंड फैलाकर, सत्ताधारी बन बैठे तुम, और हमें नीच बुलाते हो ??. खेत-खलियान हड़पकर, धनवान बन बैठे तुम, भुखमरी फैलाकर, सभ्यवान बन बैठे तुम, और हमें अछूत बुलाते हो ?? महिलाओं को देवदासी बनाकर, देवता बन बैठे तुम, दहेज़-प्रथा फैलाकर, संस्कृतिवान बन बैठे तुम, और हमें समाज-कंटक बुलाते हो ?? लोगों को जात-पात में बांटकर, मानवीय-प्रेरक बन बैठे तुम, साम्प्रदायिकता फैलाकर, शांति-दूत बन बैठे तुम,

दंगे रोके जा सकते हैं

साम्प्रदायिक और जातीय दंगों की जड़ें हमारे समाज में ही मौजूद हैं, राजनीतिक लोग तो बस उसका लाभ उठाते हैं। ये जड़ें हैं-धर्म और जातिकी। बहुसंख्यक लोगों के सामाजिक-आर्थिक शोषण की बुनियाद में भी यही दोनों चीजें हैं और अल्पसंख्यक लोगों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में भी यही दोनों चीजें हैं। इस सच्चाई को अल्पसंख्यक (शोषक) वर्ग तो अच्छी तरह समझता है, पर बहुसंख्यक (शोषित) वर्ग समझने की कोशिश नहीं करता। उन पर धार्मिक शासन करते हैं उनके धर्मगुरु और राजनीतिक शासन करते हैं उनके जातीय नेता। ये जातिवादी नेता हजारों साल पुराने अर्द्धबर्बर सामन्तवादी वर्णवादी समाज को जिन्दा रखना चाहते हैं, जिसके लिये

Syndicate content